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पीएम मोदी का आह्वान–जान है तो है जहान


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New Delhi:कुमार राकेश : कहते है कि जान है तो जहान है.जान की रक्षा के इर्द-गिर्द पूरी दुनिया का चक्र घूमता रहता है.चाहे किसी की जान क्यों नहीं हो. किसी भी प्राणी पर आये किसी प्रकार के संकट से बचना और बचाना मानव जाति का प्रथम व अंतिम मूल कर्तव्य है .होना भी चाहिए.इसलिए आजकल ब्रह्मांड पर पर आया कहर  नोवल कोरोना वायरस कोविड-19 का आतंक अब सर चढ़कर बोल रहा है.पूरा विश्व आतंकित है.विश्व के 188 देश इसके चपेट में आ चुके है.17 हज़ार से ज्यादा लोग अकाल मृत्यु के शिकार हो चुके हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साथ भारतीय चिकित्सा अनुसन्धान परिषद् (ICMR) के साथ  कई सरकारी व गैर सरकारी सस्थान अपने अपने स्तरों पर इस वैश्विक महामारी से लड़ने और टीका अनुसन्धान के लिए जी जान से जुटा हुआ है.शायद जल्द ही विश्व स्तर पर हो रहे नए शोधो से इस महामारी से मुक्ति मिल सकती है,लेकिन समय रहते रोकथाम के लिए उचित उपक्रम जरुरी है.जिसमे सामाजिक दूरी (social distancing) को बनाये रखने को भी एक प्रबल उपचार व उपाय बताया गया है.बताया जा रहा है कि इससे कोविड19 की हार और भारत की जीत पक्की हो सकती है. कोविड-19 को भारत से पूरी तरह से खदेड़ने के लिए अतिगंभीर व मुस्तैद राष्ट्र प्रहरी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने महज़ एक सप्ताह में 19 मार्च के बाद दूसरी बार  24 मार्च को राष्ट्र को सम्बोधित  कर सबको चेताया कि अगले 21 दिनों के लिए पूरे देश में lockdown रहेगा.मतलब 15 अप्रैल तक सभी देशवासियों को अपने अपने घरों में रहने के लिए आह्वान किया है.प्रधानमंत्री ने एक परिवार के सदस्य के नाते बड़े ही सम्मान भाव से हाथ जोड़कर देशवासियों से अनुरोध किया  है-घर पर रहे,सतर्क रहे.सुरक्षित रहे और कोरोना को देश से भागने के लिए एक जुट हो जाये.प्रधानमंत्री का है ये आह्वान –जान है तो जहान है. श्री मोदी ने 21 दिनों के लिए पूरे देश में  lockdown की घोषणा की.इस  घोषणा से कोरोना के  संक्रमण चक्र को तोड़ने में बड़ी मदद मिलेगी.इससे अपना देश सुरक्षित रह सकेगा.श्री मोदी ने समझाने वाली मुद्रा में कहा कि यदि हमने इस 21 दिनों के हिदायत पर पूरी ईमानदारी व शक्ति से अमल नहीं किया तो देश को बहुत बड़ा नुक्सान हो सकता है.भारत 21 साल पीछे जा सकता है.प्रधानमंत्री की बातें बहत ही गंभीर,जिम्मेदारीपूर्ण  व अतिसंवेदनशील है.इसकी पीछे की भयावह स्थिति को समझा सकता है.ये किसी भी देश के सशक्त नेता की ईमानदार स्वीकारोक्ति है.आम जन के सहयोग से ही देश मज़बूत होता है.जब देश मज़बूत होगा तभी देश का कोई भी नेता मज़बूत होगा.इसलिए देशवासी को अपने इस  मज़बूत नेता को और भी मज़बूत करना होगा,उनकी नेक सलाह को मान कर.उस पर अमल कर.सभी चाहेगा,हम चाहगे कि हम मज़बूत रहे,हमारा देश मज़बूत रहे.हमारा नेता मज़बूत रहे.सबका परिवार स्वस्थ रहे.सानंद रहे व सदैव रोगमुक्त रहे.ये सबकी आकांक्षा होती है.हमारे प्रधानमंत्री की भी यही सोच है.यही प्रण है.यही संकल्प है.हम सब उनकी इस अनुपम सद्भावना के साथ है.होना भी चाहिए.ज़िन्दगी के लिए.सबके लिये.अपने देश के लिए. एक रिपोर्ट के अनुसार  24 मार्च तक विश्व में कोविड-19 से 17  हज़ार से ज्यादा लोगों की जाने जा चुकी है.करीब चार लाख लोग इसके चपेट में आ चुके हैं.हालांकि भारत में  कोविड-19 से पीड़ितों का  आंकड़ा अभी तक 600 से नीचे बताया जा रहा है.मृतकों  की संख्या 10 बताई जा रही है.मरने वालो में 2 को छोड़कर शेष 8 की उम्र 60 वर्ष से ऊपर के बताये गए हैं .ये आंकड़ा अभी कुछ भी नहीं है.परन्तु नहीं सम्भले तो खतरा अतिभयावह हो सकता है.जैसा कि प्रधानमन्त्री ने बताया कि एक आंकड़े के अनुसार 67 दिन में जब 1 लाख तक पीड़ितों की संख्या हो जाती है .यदि संक्रमण चक्र पर नियत्रण नहीं किया गया तो वो आंकड़ा महज़ 11 दिनों में 1 लाख से ज्यादा हो जाने  की आशंका है.क्योकि इस रोग से जुड़े विशेषज्ञों के साथ WHO का मानना है एक संक्रमित व्यक्ति सैकड़ों -हजारो लोगो को  पीड़ित कर सकता है.इसलिए श्री मोदी  का आह्वान है सब घर पर रहे.विला वजह घर के लक्ष्मण रेखा को नहीं लांघे.देशवासियों का 21 दिनों के इस त्याग से देश को एक बड़ी रहत मिलेगी. वैश्विक स्तर पर कोविड 19 की स्थिति काफी भयावह व जानलेवा  हैं.एक आंकड़े को देखने से स्थिति की भयावहता का पता चलता है .22 जनवरी को विश्व स्तर पर मात्र 17 लोगो की जाने गयी थी,जबकि आज 24 मार्च का आंकड़ा 17 हज़ार को पार कर चुका है .इन मौतों में सबसे ज्यादा आंकड़ा इटली का करीब 5 हज़ार के आसपास है .जबकि इस महामारी का जनक चीन में अपेक्षाकृत कम मौतें करीब 3500 दर्ज की गयी है. शायद इसलिए श्री मोदी ने मनुहार वाले भाषण में विकसित देशो की स्थिति के मद्देनजर अपना दर्द भी साँझा किया.उन्होंने कहा  कि इटली,अमेरिका,फ्रांस ,जर्मनी जैसे देशो में कोविड-19 के आतंक से हम व्यथित है.द्रवित हैं.उनके देशो की स्वास्थ्य सेवा हमारे देश से काफी बेहतर है.फिर भी उन देशों में कोविड-19 का कहर अप्रत्याशित है .अकल्पनीय है.श्री मोदी बताया कि जब उन देशो में कोरोना को रोका नहीं जा सका तो स्वास्थ्य सेवाओ के तुलनात्मक परिपेक्ष्य में हम कहाँ ठहरते हैं.इसे कहते है एक ईमानदार राजनेता की ईमानदार सोच.श्री मोदी जैसे नेता की नीति और नीयत.एक सच्चे जनसेवक का सच्चा जनभाव.देश के प्रति एक निस्वार्थ समर्पण .सोचिये जरा.प्रधानमंत्री की बातों पर  गंभीरता से चिंतन करें.प्रधानमंत्री की चिंता और चिन्तन जायज़ है.समीचीन है. ये तो सच है इटली,अमेरिका ,फ्रांस,जर्मनी जैसे देशो की स्वास्थ्य सेवाओ के मद्देनजर भारत कही भी नहीं ठहरता है.इसका मतलब ये भी हैं भारत को अब भविष्य में अपने स्वास्थ्य बजट में काफी सुधार  करना पड़ेगा.उस बजट को बढ़ाना पड़ेगा.इसलिए प्रधानमंत्री ने कोविड-19 को देश से पूरी तरह से खदेड़ने के लिए 15 हज़ार करोड़ रूपये की अतिरिक्त धनराशि का आबंटन किया है.जिससे अपने देशवासियों की स्वास्थ्य सेवाओ के तहत कोई धन संकट न हो .कोविड-19 के खिलाफ जंग जारी रहे, जिससे हम उस कहर से पूर्णतया मुक्ति पा सके. प्रधानमंत्री ने कोविड19 से लडाई के लिए मीडियाकर्मियों की भूमिका की भी सराहना की.उन्होंने साथ स्वास्थ्य सेवा से जुड़े सभी लोगो का,अस्पतालों का,पुलिस महकमा के साथ राज्य सरकारों की भूमिका की भी भूरि-भूरि प्रशंसा की.सबको उन सबो का साथ देने की अपील की.उन्होंने ये भी हिदायत दी कि अफवाहों व अन्धविश्वास से भी बचाव जरुरी है. क्योकि देश अभी सहमा हुआ है.सशंकित हैं.दहशत में है.इसलिए श्री मोदी ने सबको संयत व सतर्क रहने को कहा है.उन्होंने भरोसा जताया कि देश में आवश्यक वस्तुओ व सेवा में  कोई भी कमी नहीं होने दी जाएगी.संभावना है इस माहौल में होम डेलिवरी व्यवस्था को आवश्यक कर दिया जाये. भारत के स्वास्थ्य व स्वस्थता को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी भी काफी चिंतित हैं.उनकी चिंता भी जायज़ है.देश के लिए और देशवासियों के लिए.वतन के लिए और वतन के आम जनों के लिए.हम सब उनके साथ है.देश के लिए,देश को मज़बूत करने के लिए. सच कहा गया है जीवन है तो संघर्ष हैं.संघर्ष है जीवन.हम सब संघर्ष रत हैं समग्र कल्याण के तहत अपने लिए,अपनों के लिए और अपने देश के लिए.इसलिए हमारे प्रधामंत्री मोदी हमारे लिए संघर्षरत है.हम उनके लिए ,उनके कल्याणकारी कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए संघर्षरत होना जरुरी है. 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