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राहुल गाँधी ने आखिर क्यों की प्रेस वार्ता ??


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New Delhi:कुमार राकेश : विश्व के इस कोरोना महामारी संक्रमण काल में क्या कांग्रेस भी संक्रमित हो गया है ? क्या कांग्रेस भ्रमित हो गया है ? क्या कांग्रेस के पास अपनी कोई ठोस नीति नहीं है ? या उनके पास मोदी सरकार के कोरोना युद्ध कार्यों का सिर्फ नक़ल है ? आखिर कांग्रेस नेता राहुल गाँधी को कोरोना मसले पर प्रेस वार्ता करने की जरुरत क्यों पड़ी? देश में ऐसी क्या परिस्थितियां आ गयी थी कि देश की अतिप्राचीन पार्टी के पूर्व अध्यक्ष को विश्व के अति लोकप्रिय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र भाई मोदी के कार्यशैली पर अपने तरीके से प्रहार करने की जरुरत आन पड़ी.राहुल कांग्रेस की जन विरोधी आपातकाल को भूलकर इस महामारी काल को आपातकाल बता रहे हैं.क्या हो गया है राहुल गाँधी को ? जहाँ विश्व स्तर पर भारत का जय-जयकार हो रहा हो,विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भारत की तारीफ़ कर रहा हो,विश्व बैंक और अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष भारत की कोरोना युद्ध शैली की खुले आम तारीफ़ कर रहा हो.वही राहुल गाँधी मीडिया की मदद से अब तक की अतिलोकप्रिय व जनवादी मोदी सरकार को सिर्फ नसीहते देकर अपनी शैली में कोसते नज़र आये.इससे ये साबित होता है कांग्रेस अब आम जनो की नहीं बल्कि खास जनों की पार्टी है.पार्टी में किसी भी मसले पर एक मत नहीं है.पार्टी में भ्रम की स्थिति है.पार्टी के नेताओ के बीच उचित समन्वय का घोर अभाव है.भाजपा कई मायनों में कांग्रेस से कई मायनों में बहुत आगे निकल गयी है.कांग्रेस के लिए उनका परिवार ही देश है-पार्टी है,जबकि भाजपा के लिए सिर्फ देश ही उनका परिवार है. कोरोना युद्ध के परिपेक्ष्य में 16 अप्रैल 2020 को राहुल गाँधी ने तालाबंदी नीति,टेस्टिंग,प्रवासी मजदूरों की स्थितियों को लेकर अपनी शैली में मोदी सरकार की खिचाई कर दी.उनका कहना था कि तालाबंदी से कोरोना नहीं भागेगा,बल्कि इसका उल्टा असर हो सकता है.उन्होंने अपने अतिशोधपूर्ण दिमाग से तालाबंदी को सिर्फ “पॉज बटन”बताया,जबकि विश्व के कई विकसित देश आज की स्थिति में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी के अनुपम कार्य शैली पर तारीफों के पुल बांध रहे हैं.शायद राहुल गाँधी और उनकी पार्टी के कई नेताओ को ये मोदी सरकार की चौतरफा प्रशंसा गले नहीं उतर रही है.ये बात अलग है कि राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष व वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद प्रधानमंत्री मोदी के साथ सर्वदलीय बैठक में अपनी शैली में मोदी सरकार की तारीफ़ की.कुछ दिन पहले कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने भी प्रधानमंत्री श्री मोदी की तारीफ़ की थी. राहुल देश में मरकजी जमात की राष्ट्र द्रोही व जन विरोधी नीति पर चुप रहे.सबको पता है कि भारत में मुसलमानों की सबसे पुरानी रहनुमा कही जाने वाली तबलीगी जमात ने देश पर जिस तरह से कोरोना कहर बरपाया है,उसकी जितनी भी निंदा की जाये, कम है.आज की स्थिति में भारत के कुल कोरोना प्रभावित मरीजों का 45 प्रतिशत से ज्यादा तबलीगी जमात के लोगो की है.उसके मुखिया मौलाना साद देश में कोरोना बम का आग फैलाकर फरार हैं.दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले भी दर्ज किये हैं.15 अप्रैल को मुरादाबाद में जमाती लोगो ने जो अमानवीय हरकतें की हैं ,उसकी कोई माफ़ी नहीं बनती.जमाती लोगो को बचाने गए डाक्टरों और अन्य सहकर्मियों पर पत्थर बरसाए जा रहे हैं.ऐसी घटनाये मानवता के नाम पर कलंक है .पर सदा मुसलमानो को वोट बैंक के लिए उपयोग करने वाले राहुल गाँधी ने उस प्रकरण पर कोई टिपण्णी तक नहीं की .हालांकि इस बाबत News24 टीवी के रमण कुमार ने राहुल गाँधी से सीधा सवाल किया था.राहुल सिर्फ एक बात कह कर चुप हो गए कि अगर बीमारी से लड़ना है तो जाति,धर्म व सम्प्रदाय से परे हटकर इस कोरोना वायरस से लड़ना होगा. उनके इस प्रेस वार्ता के पूर्व भी उनकी पार्टी ने ऐसी घटनाओ की कोई निंदा तक नहीं की है .ऐसा क्यों?किसलिए ? ये कब तक चलेगा.पूरा देश देख रहा है.पूरा विश्व देख रहा है.कांग्रेस के अलावा उत्तरप्रदेश के समाजवादी पार्टी और अन्य पार्टियाँ भी इस प्रकरण पर चुप क्यों हैं ? मेरे विचार से तबलीगी जमात के लोगो द्वारा किया जा रहा ऐसा अमानवीय कार्य राष्ट्र द्रोह की श्रेणी में आता है.इसलिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐसे अमानवीय कार्यों को राष्ट्रीय सुरक्षा में खतरा बताया है.ऐसे आरोपित व गिरफ्तार लोगो के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कारवाई को जरुरत बताया.मेरे विचार से ऐसे राष्ट्र द्रोहियों को,चाहे वो किसी भी धर्म व सम्प्रदाय के हो,कतई नहीं बख्शा जाना चाहिए.उस सबको अरब देशो की तर्ज़ पर कठोर सज़ा दिए जाने की जरुरत है. देश में प्रवासी मजदूरों की मदद की बात पर तो राहुल ने जोर दिया.बड़ी बड़ी खोखली बातें की.केंद्र सरकार को विशेष नीति बनाने की बात भी कही,परन्तु 28-29 मार्च को दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनस पर हजारों की संख्या में अप्रत्याशित जमावड़ा,14 अप्रैल को मुंबई में बांद्रा स्टेशन पर अनियंत्रित भीड़,दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी मरकज़ का गैर क़ानूनी जमावड़ा आदि मसलो पर राहुल गाँधी पुराने वाले महात्मा गाँधी वाले मुद्रा में दिखे.कुछ जवाब तो दिए .लेकिन वो था,गोलगप्पे की तरह.प्रवासी मजदूरों को लेकर राहुल गाँधी के विशाल ज्ञान पर भी मेरे को हैरानी हुयी,जिसे उन्होंने इस समस्या को सिर्फ भारत की समस्या बताया,जबकि यह सर्वविदित है ये प्रवासी मजदूर व उनका जीवन यापन एक वैश्विक समस्या है.जिसके लिए संयुक्त राष्ट्र की इकाई अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन(ILO) कई देशो में उन प्रवासी मजदूरों के कल्याण के लिए कार्य रत है.जिसमे भारत के भी मजदूर शामिल हैं. राहुल गाँधी ने कई बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी के विजय शैली पर भी प्रहार किया.उनका कहना था कि आज की स्थिति में किसी को भी विजयश्री नहीं लेना चाहिए.ये गलत होगा.तो क्या प्रधानमंत्री अपने सारे कार्यों का श्रेय राहुल को दे देते ?! विशाल ह्रदय प्रधानमन्त्री मोदी ऐसा कर सकते थे,यदि राहुल और उनकी पार्टी आम जन के लिए अब तक कोई ठोस कार्य किये होते.की ठोस जन नीति बताया होता ? जो नेता तालाबंदी का प्रथम सफल चरण के बाद दुसरे चरण में सिर्फ कोरा ज्ञान बघार रहा हो.वो भी बिना किसी ठोस आधार या दस्तावेज़ के.उनके अद्भुत ज्ञान पर क्या टिपण्णी की जाये? बेहतर तो ये होता कि राहुल और उनकी पार्टी कोरोना लडाई को लेकर के नया रोड मैप बनाकर देश हित में प्रधानमंत्री को सौंपते,फिर उसके बाद मीडिया को संबोधित करते.वो ज्यादा कारगर कदम होता.इससे उन्हें सराहना मिलती.लेकिन ऐसा नहीं करके मोदी सरकार के हर कदम पर सवाल उठाना? क्या एक रचनात्मक विपक्ष की भूमिका है? उनकी सारी बातों में मोदी सरकार द्वारा किये गए व किये जा रहे कार्यों पर सिर्फ टीका-टिपण्णी रही.वो नकलची वाले अंदाज़ में . राहुल गाँधी ने राज्य सरकारो को धन और ताक़त देने को जरुरत बताया,जबकि दूसरी तरफ गैर भाजपा राज्यों के साथ कांग्रेस के कई नेताओ ने भी मोदी सरकार के कार्य शैली की प्रशंसा की है.क्या कहना चाहते थे राहुल गाँधी ?क्यों कहना जरुरी पड़ा राहुल गाँधी को? मोदी सरकार पर सीधा प्रहार से तो वो बचते नज़र आये,जबकि एक एक कार्यों पर सवाल उठाते रहे.एक तरफ ये कहना कि अभी मोदी से लड़ने की जरुरत नहीं कोरोना वायरस से लड़ने की जरुरत है. उनकी बताई गयी पूरी रणनीति मोदी सरकार द्वारा किये जाने वाले सभी कार्यों की नक़ल लगी.ऐसा लगता है कि उस नक़ल में राहुल गाँधी ने कही भी अपना अक्ल नहीं लगाया.छोटे व मझोले उद्योग के लिए राहत,खाद्यान्न सुरक्षा,सबको अनाज व भोजन,आम लोगो के खाते में सीधा ट्रान्सफर जैसे मसले में कुछ भी नयी बातें नहीं थी.मोदी सरकार तो इससे आगे बढकर कई ऐसे काम कर रही है,जिसके बारे में इस वातानुकूलित कमरे के अभ्यस्त राजकुमार राजनेता राहुल गाँधी को पता ही नहीं.उन्होंने देश के साथ कोरोना प्रभावित के लिए कांग्रेस पार्टी की किसी भी प्रकार की आम जन कल्याण योजना का कोई जिक्र नहीं किया.होगा तो करेंगे न.जबकि भाजपा ने पहले दिन से देश से गाँव स्तर पर प्रधानमंत्री श्री मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के आह्वान पर हर प्रकार के मदद कार्य में जुटे हुए हैं.भाजपा के सभी केन्द्रीय व राज्य स्तर के सभी मंत्री,सांसद,विधायक से लेकर मंडल अध्यक्ष ताज जन-जन सेवा में जी जान से जुटे हुए हैं. देश व राज्यों के राजनीतिक गलियारों में,संसद से सडक तक शायद इसलिए ये अक्सर सुनने को मिल जाता है कि कांग्रेस में जब तक राहुल गाँधी हैं,तबतक भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी मज़बूत हैं व रहेंगे .वैसे श्री मोदी की राहुल गाँधी से किसी भी मायने में तुलना करना कही से भी न्यायोचित नहीं होगा.यदि कोई ऐसा करता है तो उन लेखको .पत्रकारो,विश्लेषको ,टिप्पणीकारो को किस श्रेणी में रखा जाना चाहिए,ये हमारे सजग व सुधी पाठक बेहतर समझते हैं . 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