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शर्म पाकिस्तान को कभी नहीं आती…


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New Delhi:पाकिस्तान एक बार हंदवारा की घटना से फिर से पगला गया लगता है.पाकिस्तान को कोरोना से मर रहे अपनी जनता की कोई  परवाह नहीं है.शायद इसलिए अपनी कमजोरी छुपाने के साथ तिल-तिल मरती जनता का ध्यान बटाने  के लिए फिर से ऐसा कुकृत्य किया.जिसके लिए पाकिस्तान को कतई माफ़ नहीं किया जा सकता.क्यों नहीं मानता पाकिस्तान? क्या हो गया है पाकिस्तान को.ऐसा लगता है बार बार मुंह की खाने के बावजूद पाकिस्तान थेथर हो गया हैं.संवेदन शून्य हो गया है.क्यों नहीं सुधरता है पाकिस्तान? या सुधरना ही नहीं चाहता? ऐसे कई सवाल है पाकिस्तान को लेकर.पूरी तरह कंगाल हो चूका है पाकिस्तान.फिर भी एक बच्चे की तरह कश्मीर की ज़िद पर है.लेकिन मिलना तो उसे कुछ भी नहीं.कुछ भी कर ले .कोई नहीं बचाएगा अब बेशर्म व नमकहराम पाकिस्तान को.पाकिस्तान ने तो अब भारत के लिए बर्दाश्त की सभी सीमायें पार कर दी है.लगता है पाकिस्तान को  फिर से पांचवी बार घुटनों पर आना ही पड़ेगा.वो समय दूर नहीं,ऐसा लगता है. पाकिस्तान की स्थिति महाभारत के दुशासन जैसी है.दोनों में कई समानताएं हैं.मेरे को लगता है, जैसी स्थिति दुशासन की हुयी थी,वैसी ही पाकिस्तान की होगी.विश्व चर्चित भारतीय महाग्रन्थ महाभारत में एक उद्धरण है-श्रीकृष्ण और दुशासन का.दुर्योधन का भाई था,दुशासन.बड़ा ही घमंडी व बददिमाग.एक दम पाकिस्तान जैसा.अपनी ताक़त तो थी नहीं,अपने तथाकथित भाइयों के बल पर इतराता रहता था.किसी को कभी भी परेशान कर देता था.एक बार श्रीकृष्ण के हत्थे चढ़ गया.और उसका समग्र कल्याण हो गया.उसको नहीं पता था कि श्रीकृष्ण ने उसकी माता को वचन दिया था कि कभी ऐसी परिस्थिति आई व दुशासन नहीं सुधरा,उसने स्वनियंत्रण नहीं किया तो श्रीकृष्ण उसे मृत्यु दंड अवश्य देंगे.श्रीकृष्ण ने उसकी माता से 100 गलतियों की माफ़ी का वचन दिया था.हुआ वही.जो होना था.दुशासन अपनी औकात भूल अपनी सारी सीमायें लांघ गया.परिणामस्वरूप उस बेचारे दुशासन की अपनी जान गवानी पड़ी.ये कहानी करीब 5 हज़ार साल पुरानी है,लेकिन आज की स्थिति में वही कहानी पाकिस्तान रुपी दुशासन के खिलाफ फिट बैठती है. पाकिस्तान के पापों की गिनती जारी हैं.भारत रूपी श्रीकृष्ण उसकी एक एक पाप की क्रमवार गिनती का हिसाब रख रहा है. शायद इसलिए भारत ने पहली बार पाकिस्तान को गिलगित व बाल्टिस्तान खाली करने का निर्देश दिया हैं.भारत के इतिहास में ये पहली बार हुआ है .भारत अब आक्रामक भूमिका में हैं.पाकिस्तान को सोचना चाहिए.आज की स्थिति में उसके पास अपनी जनता को बचाने के लिए न तो दवाइयां हैं न ही वेंटिलेटर.भारत ने उसे दवाइया दी हैं,बदले में पाकिस्तान भारत को लगातार दर्द दे रहा है.पिछले दो दिनों में पाकिस्तान ने कश्मीर में 8 से ज्यादा भारतीयों सैनिको को मरवा दिया.इससे यही लगता है पाकिस्तान सुधरने वाला नहीं.जनवरी 2020 से अबतक करीब 60 से ज्यादा पाक आतंवादी मारे जा चुके है.एक सरकारी आंकड़े के अनुसार 2015 से 2019 तक 891 आतंकवादियों मौत के गाल में भेजे जा चुके है जबकि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने 265 आतंकवादियों को जिन्दा गिरफ्तार भी किया है. पाकिस्तान की हालत व हालात देखिये.घर में नहीं दाने,अम्मा चली भुनाने.देश में खाने को लाले पड़े हैं.लेकिन वो भारत पर बम बरसायेगा ही,क्यों? पूरी दुनिया कोरोना वायरस के चपेट में हैं,पाकिस्तान आतंकी वायरस के जाल में.उसके घर में हजारो लोग कोरोना कोविड19 से मर रहे हैं,लेकिन वो भारत में बम-गोलों से जीवन को तबाह करने जुटा हुआ है,क्यों? इससे ये तो साफ़ हो गया है कि भारत की कीमत पर पाकिस्तान के ये नया नवेला राजनेता इमरान खान अपनी तुच्छ राजनीति की रोटी सेकना चाहता है.लेकिन वो भूल गया लगता है पाकिस्तान की अवाम भी अब जाग गयी है.वहां का मीडिया भी पहले की तुलना में सजग हो चूका है.अब कोई किसी भी पाकिस्तानी राजनेता की राजनीति सिर्फ भारत विरोध से नही चलने वाली. रही बात जम्मू-कश्मीर की,अब वो दिन दूर नही,जब सभी कश्मीरी एक जुट होकर पाकिस्तान और विश्व को दो टूक करारा जवाब देंगे.क्योकि जम्मू-कश्मीर अब नए रूप में हैं.प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी सरकार द्वारा संस्कारित नए तेवर व जोश  में हैं हमारा कश्मीर.सबको पता चल गया है कि आने वाला समय जम्मू-कश्मीर के लिए स्वर्णिम काल है.हर तरह से स्वर्णिम.हर क्षेत्र में स्वर्णिम.सबका कश्मीर,हम सबका कश्मीर.भारत का कश्मीर.सिर्फ भारत का ही सदैव. कहते हैं–सांच को आंच नहीं.पर भारत ने सदैव सत्य का साथ दिया है.भारत ने कभी भी आज तक पाकिस्तान पर हमला नहीं किया.जो भी किया,पाकिस्तान ने ही किया.परन्तु गलत ही किया.क्यों किया,ऐसा लगता है शायद पाकिस्तान को भी नही पता.क्योकि उसके तार भी कही और से जुड़े लगते है.इस मसले पर कई पाकिस्तानी पत्रकारों व नीति निर्माताओ द्वारा सवाल भी उठाये जाते रहे हैं.लेकिन ऐसे कब तक चलेगा.पाकिस्तान शांत क्यों नहीं रहता.क्यों नहीं रह सकता.भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी ने भी तो 2014 में आने के बाद पाकिस्तान से “भ्राता भाव” से मित्रता की जोरदार भावुक पहल की थी,लेकिन परिणाम वही ढाक के तीन पात.ऐसा लगता है पाकिस्तान,हम नहीं सुधेरेगे के मोड में चला गया है. कहते है कई निजी मजबूरियों की वजह से पाकिस्तान की स्थिति कठपुतली जैसी हो गयी है.उसका अपना कुछ भी नहीं है.जो जैस नचाता है,वो बेचारा,मजबूर वैसे ही नाचता है. पाकिस्तान की दुर्भिक्ष स्थिति पर मेरे को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय का एक वाकया याद आता है . 2017 में भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र में ओने मुख्य भाषण में पाकिस्तान को जमकर लताड़ा था.उस भाषण से पूरे सभागार में तालियों की गूँज सुनाई दी थी.मैं भी उस वक़्त संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय,न्यूयॉर्क के उस मुख्य सभागार में मौजूद था.अमेरिका स्थित वरिष्ठ पत्रकार ललित कुमार झा और हिन्दू अख़बार के जार्ज वर्घीज़ भी हमारे साथ थे.हम सबने वो ऐतिहासिक भाषण सुना था.जिसमे सुषमा जी ने कहा था कि 70 वर्षो में भारत ने काफी तरक्की की.बड़े बड़े अस्पताल बनाये.कई विश्वविद्यालयों का निर्माण करवाया.आधारभूत संरचनाओ में कई नए कीर्तिमान स्थापित किये.कई डाक्टर,वैज्ञानिकों,इंजीनियरों की फौज तैयार की.विश्व शांति व बचाव के लिए कई नए शोध व अनुसन्धान किये.परन्तु पाकिस्तान ने क्या किया? आतंवादियों को ट्रेनिंग दिया. आतंक के नए नए गढ़ बनाये.पूरे विश्व में अशांति व हिंसा का ज़हर फैलाया.आखिर क्यों ? श्रीमती स्वराज ने अपने सिर्फ 12 मिनट के भाषण में पूरे विश्व को झकझोर दिया था .पर बेशर्म व नापाक  पाकिस्तान पर कोई असर नहीं पड़ा.हमारे साथ बैठे पाकिस्तान के पत्रकार ने मेरे से पुछा-क्या बोल रही हैं ये मोहतरमा? कुछ भी बोले जा रही हैं ? मैंने उनको जवाब दिया,यदि आपके पास या आपके देश के पास हमारी विदेश मंत्री के आरोपों का कोई जवाब हो तो आप ही बता दो.हम सब उसे कवर करेंगे.ये सुनते ही वो सज्जन वहां से उठे और चुपचाप खिसक लिए.हम लोगों से सोचा-आखिर क्या करता वो बेचारा पत्रकार. भारत ने सदैव एक अच्छे व जिम्मेदार पडोसी धर्म का निर्वहन किया है.करता रहेगा.कोई कुछ भी कहे,कुछ भी करे.पंचतंत्र की कहानिया सदैव सत्य ही कहती है.उन कहानियों में एक कहानी साधु की है.साधू को स्नान के वक़्त एक बिच्छु मिलता है.उसे बार डंक मारता है.साधु को कष्ट होता है.वही पर एक अन्य व्यक्ति इस दृश्य को देखता है.पूछता है –हे मुनिवर,ऐसा क्यों?आप उसे मार क्यों नहीं देते?इस पर उस साधु का जवाब होता है-देखो बन्धु,डंक मारना बिच्छू का स्वाभाव है,जीवन देना व बचाना हमारा.हम क्यों बदले स्वयं को,उसकी वजह से.उस कथा के परिपेक्ष्य में वो साधु भारत है और पाकिस्तान सदैव डंक मारने वाला बिच्छू.  पाकिस्तान को लेकर भारत तो भ्रमित नहीं है,लेकिन ऐसा लगता है कि पाकिस्तान अपने अस्तित्व को लेकर भ्रमित जरुर  है.1947 में देश के दुश्मनों ने भारत के साथ के महापाप किया था.दो बड़े कहे जाने वाले छोटे दिल के स्वार्थी नेताओं की निहित स्वार्थों  की राजनीति की वजह से हिन्दू-मुस्लिम भावना को लेकर पाकिस्तान को अलग किया गया था.बड़े भारी दिल से भारत से पाकिस्तान को जुदा किया गया था.उस महापाप के जड़ में महात्मा कहे जाने वाले मोहनदास करम चंद गाँधी और चाचा कहे जाने वाले आज़ाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बनने को बेताब जवाहरलाल नेहरु थे.यदि श्री नेहरु महज़ तीन महीने रुक जाते और जिन्ना की बात मान लेते तो आज विश्व क नक़्शे पर पाकिस्तान क्या बांगला देश  भी नहीं होता.तब सोचिये भारत की स्थिति कितनी मजबूत  होती.यदि आप विश्व के इतिहास पर नजर गहराई से अध्ययन करे तो महज़ 1250 ईस्वी के पहले का आर्यावर्त कितना विशाल था.पहले अपने इस देश का नाम आर्यावर्त था.फिर हिंदुस्तान बोला गया.आज़ादी के बाद दो नए नाम दिए गए-भारत और इंडिया.ये भी अपने आप में अजूबा है कि विश्व में हमारा ही देश ऐसा है ,जिसके आज भी तीन नाम है .जो कि नहीं होना चाहिए.कई स्तर पर इसक लिए संघर्ष जारी है.सच कहा गया है लम्हों ने खता की,सदियों ने सजा पाई.पर अब और नहीं.. कहते हैं समय से बड़ा कोई नहीं.पहले कभी अपने बल्ले व गेंद से देश को बहलाने वाले और अब अपनी भोली सूरत व धूर्त सीरत से बरगलाने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान आज सचमुच में बेचारे व मजबूर दिख रहे  हैं.उनके तो अपने सपने थे.उनको तो सिर्फ प्रधानमंत्री बनने से मतलब था.वो पूरा हो गया.करीब 22 वर्षों के सतत संघर्ष के बाद.सबको पता है कि इमरान के विचार निजी स्वार्थ से भरपूर है .परमार्थ का कोई स्थान नहीं. सत्य से कोई मतलब नहीं.जबकि “सत्यमेव जयते” तो भारत की मूल संस्कृति है.हमारा जन-जन,रोम रोम उस संस्कृति से ओत-प्रोत है.शांति व अहिंसा तो हमारा मूलाधार है.तभी हम विश्व गुरु थे.फिर होंगे जल्द ही. 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